Sunday, 12 July 2009

पति की पद बंध्या भारतीय नारी है(कविता)


स्त्रियों की दशा और उनकी स्तिथि पर ना जाने कितना लिखा और किया गया पर क्या उनकी स्तिथि सुधरी है मुझे तो नहीं लगता की उसमे जरा भी सुधार हुआ है ,, महिला अरक्षन की बात करते है इसमें महिलायों का हित कम अपनी राजनैतिक और आर्थिक मह्तात्ता ज्यादा होती है कहते है महिलाये हर क्षेत्र में है मानता हूँ हर क्षेत्र में है पर कितनी क्या वे उन पिछडी महिलायों की बात कर रहे है जिनकी स्तिथि में सुधार की आबश्यकता है मैं नहीं मानता की आम महिलायों की स्थिति में कोई सुधार हुआ है हाँ प्रताड़ना के तरीके और शोषण के तरीके जरुर बदले है पहले किसी और ढंग से प्रताडित और शोषित अब किसी और ढंग से पर क्रम रुका नहीं है अगर रुका होता तो येसी घटनाये नहीं होती जो आज भी आम है कुछ अखबारों में आती है कुछ खो जाती है ऐसी ही एक महिला की घटना मेरे भी दो आंशू उसे सत्वब्ना के रूप में



यह महिला सशक्तिकरण की बात ,,
करने वालों के गाल पर तमाचा है ,,
महिलायों के नाम पर सिक रही ,,
राजनैतिक रोटियों की जली हुई बू है ,,,
उत्पीडन और प्रताड़ना ,,,
झेलती एक आवाज है ,,
समाज से किया गया ,,
प्रश्नातुर सम्बाद है ,,,
प्रगति की खाल के नीचे,,
सडन मारता झूठी परंपरा का घाव है ,,
ये संसद के गलियारों में,,,
आरक्षण के लिए चीखती ,,
राजनितिक सत्ता नहीं है ,,
टीवी पर न्यूज़ पढ़ती और ,,
फिल्मो में नाचती सुन्दरता भी नहीं है ,,
ये डिस्को में रंगिनिया मनाती ,,
उन्मुक्तता भी नहीं है ,,
न ही ये जुलूश निकालती ,,
हक़ मागती शक्ति ही है ,,
ये निश्छल ममत्व भरी माँ है ,,,
स्नेह और त्याग भरी बहन है ,,
असीम पीडा और दर्द समेटे पत्नी भी है ,,,
और अनेको रिश्तो के जाल में ,,
घिरी उन्हें संयोजित करती एक स्त्री भी ,,
पर सबसे अलग ये असह त्रासदी झेलती ,,

पति की पद बंध्या भारतीय नारी है ,,,,

3 comments:

Nirmla Kapila said...

baभुत मार्मिक घटना है आंम्ख नम हो गयी स्त्रि मुक्ति तो एक शोशा है इसके लिये कुछ नहीं हो रहा जो कुछ महिलायें आगे आयी हैं वो अपनी मेहनत और लगन से मगर एक आशा जरूर है कि जो पहले था अब नहीं है और जो है वो भी नहीं रहेगा धीमी प्रक्रिया है मगर समाज बदल रहा है तुम्हारी कविता तो दिल को छू गयी शब्द संयोजन ही नहीं भाव भी बहुत सुन्दर और सटीक हैं लेकिन स्त्रि की दशा और दिशा मे जब तक पुरुष का सहयोग नहीं होगा तब तक कुछ नहीं हो सकता पुरुश को भी अपनी मान्सिकता बदलनी होगी तभी इस मे कोई सुधार होगा तुम मे देश और समाज सुधार का जज़्वा देख कर बहुत खुशी होती है बहुत बहुत आशीर्वाद और शुभकामनायें

अविनाश वाचस्पति said...

पति की पद बंध्‍या भारतीय नारी

इन छह शब्‍दों में पूरी दास्‍तां कह दी है आपने।

संगीता पुरी said...

नारी के लिए आपके मन में जो सम्‍मान है .. वह पूरी कविता में परिलक्षित होती है .. बहुत सुंदर रचना लिखा है .. बहुत बहुत बधाई !!